24 July 2017

सौ चुहे खा कर तो बिल्ली भी हज को चले जाती है, आप कब हज पर जा रहे हैं महाशय !!




अब जब टमाटर 40/- पार बिक रहा है तो मैं नासमझ समझ रहा हूं की "किसानों को उनकी फसल का उचित दाम" मिल रहा है ...
अरे, जब हम 40/- में खरीद रहे हैं तो दे दो ना किसानो को 25/- का भाव
... मगर नही ये टमाटर भी किसानो ने तो 3/- रुपये किलो में ही बेचा होगा
गरीब और मध्यम वर्गीयों के टेक्स के रुपयों से 2/- का प्याज 8/- में खरीद कर फिर व्यापारी को 3 रुपये 10 पैसे में बेचने वाली सरकार धन्य है.. 3 रुपये 10 पैसे में भी लालची, मक्कार, फकीर, सरकारी अधिकारी कमीशन ले रहे है.. एक का वीडीयो वायरल हुआ तो उसकी नौकरी गई.... ये ढांढे भ्रष्टाचारी अफसर नही जानते के शास्त्रों में लिखा है की भ्रष्टाचार से की गई कमाई से कीडे......... उल्टी दस्त हेजा ...... बच्चे विक..... सॉरी दिव्य... खून की ...
हा हा हा :) :) :) कैसे समझाउं इन मक्कारों को...लानत है इन भ्रष्टाचारीयों पर...
 
मृतक नामांतरण तक का पैसा रिश्वत में देना पडता है किसान को... इसकी हाय किसे लगेगी... पात्र गरीब को बीपीएल राशन कार्ड बनवाने में इतना कष्ट है जितना 9 माह में बच्चा पैदा करने में नही होता होगा और 5 जनसुनवाई में जाना अलग .. वहीं अपात्र लोग (जो गरीब नही हैं ) बी पी एल का राशन ले रहे हैं... गरीबों का हक खा रहे हैं...ज़मीर मर चुका है... सरकार बस उन्हे खुश करती है जो ज़्यादा की तादाद में नाराज हों... किसान नाराज तो मरने वाले को एक करोड... एक करोड माने इतना पैसा, मुख्यमंत्री बनने से पहले शिवराज सिंह चौहान ने खुद नही देखा होगा... किसका पैसा है ये ... ये मेरा और आपका पैसा है... पिप्लिया मण्डी में जिन व्यापारीयों के यहां आग लगाई गई क्या उनके परिवार में से भी किसी का मरना ज़रुरी हैं ? क्या तब उनके परिवारों के बारे में सोचा जायेगा...
 

क्या इस राज्य में सम्मान से रहने के लिये मरना ही ज़रुरी हैं... अपनी नाकामीयों को छुपाने का मुआवजा एक करोड कैसे तय कर सकती हैं सरकार !!!
लोक सेवा प्रबंधन के नाम पर सरकार से मूल भुत दस्तावेजों को प्राप्त करने पर शुल्क लगाने वाली सरकार के मुखिया को अब यह कहना पड रहा है की हम फलां समय से फलां समय तक खाता-खसरा की नकल मुफ्त देंगे... नब्ज़ पकड में तो आई मगर इलाज नही...खसरा मुफ्त में नही चाहीये...


सर भ्रष्टाचार मुक्त चाहीये राज्य... अफीम काश्तकारों के पास ज़मीन ना हो और अपने भाई की ज़मीन पर पट्टा लेना हो तो लीगल डॉक्युमेंट्स में 4 हज़ार रुपये खर्च हो जाते हैं... नार्कोटीक्स कार्यालय में जाने के पूर्व नार्कोटीक्स द्वारा तय मुखिया 60 हज़ार रुपये प्रति किसान ले के अधिकारीयों को चढाता है तब पट्टा मिलता है,और पैसे ना दो तो पट्टा नही मिलता... ना ही यह पता चलता है की पट्टा काटा क्यों गया... और हुकुम से पूछ लो के मुझे पट्टा क्यों नही मिला तो फिर सात पीढीयों तक पट्टा नही मिलेगा...

 
सडक बनाने वाले ठेकेदार को भूमी पूजन का खर्च तो उठाना ही है साथ ही उसी दिन माननीय विधायक जी के नाम का लिफाफा भी आपकी सरकार का अधिकारी दाब लेता है, फिर अपना हिस्सा निकाल कर विधायक जी तक वह लिफाफा पहुचा देता है... इसके बाद लोकार्पण तक का सारा खर्च वहन करते हुए अपने काम की अंतिम किश्त पाता है ठेकेदार... अब विधायक जी किस मूंह से पुछेंगे के भय्या दो चार महिने में ही नई सडक का कचुमर कैसे निकल गया...
मैं भी ऐसे बता रहा हूं जैसे की मुख्यमंत्री जी को कुछ पता ही ना हो... हालात बहुत गंभीर हैं... मैं कहता हूं, सौ चुहे खा कर तो बिल्ली भी हज को चले जाती है... आप कब हज पर जा रहे हैं महाशय !! 

~ कपिल सिंह चौहान

+91 9407117155

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05 July 2017

पत्रकार



चाँद को ठोर देता हूँ,
पहाडो के राज़ कहता हूँ
बहुत मुश्किल नही है ये,
की दरख्तों को भी छॉंव देता हूँ मैं...

रास्ता सभी का एक ही है,
मंजिल भी एक ही है
बस सफर है ये के जहाँ,
खूsssल के सांस लेता हूं मैं...

झूंठ-फाश का शगल
है.. तो है ! तो ! है तो,है..
हाँ, माना के कभी कभी
मुसीबत, मोल लेता हूं मैं... 

मैं क्या हूँ, क्या हो तुम
चंद लम्हों में हो जायेंगे गुम
झूंठ बिकता है जिस बाज़ार में,
सच को बांच देता हूँ मैं...

दुआओं में जिंदा रहुंगा,
देखना गर सच कहुंगा मैं
मैं रहूं ना रहूँ, बेपरवाह हो
अफवाहों के पर कतर देता हूं मैं... 

ओट में छिपी हकीकत को
मुझसे देखा नही जायेगा
फिक्र यही है के किसी रोज ना
  मदमस्त इस और लेटा रहूं मैं...

~ #कुं‌_कपिल_सिंह_चौहान
+91 9407117155 
#Kapilsingh #mp360news #पत्रकार #Copyrightkapilsingh
— with Kunwar Kapil Singh Chauhan

18 January 2017

शिवराज भिया, तुमने नर्मदा किनारे दारु बेन कर के ठिक नी किया !!!

शिवराज_भिया, हां हम तुमे मामा भी के सकते हैं, क्योंकी हमाई अम्मा तो मां नर्मदा हैं.. और तुमने उसकी रक्षा का ठेका ले लिया है. तो तुम मामाइ हुए ना ! मगर पहले मेन बात तो सुन लो...
 
अमभी मध्यप्रदेश केई हैं.. और तुमने नर्मदा किनाये दारुबंदी का डिसजन ले कर ठिक नी किया... अरे, एक कारण तो ढंग्का बताओं की हमे लगे के तुमने भोत भेतरीन काम किया!! लोगहोन के रे हैं की इससे नर्मदा मय्या गन्दी नी होगी... नर्मदा मय्या कौन से पेग लगा रई थी जो वो दुकान पास होने से गंदी हो जाती ? बताओ कैसे गंदी हो जाती ? चलो, जो पिते हैं वो गंदी करते हैं, अपन ये भी नी मानते... कौन बेवडा होगा जो दारु जैसा बहुमुल्य पेय पदार्थ नर्मदा में ढोलता होगा ! जिसका कोई फायदा नी, हैं! अच्छा, छोरे होन के रे हैं की खाली बोतलें फेकते हैं पियक्कड , इसलिये बेन की है वआं... तो तुमने पानी की बोतलों पे तो बेन नी लगाया वां...कितने ही पानी फिल्टर प्लांट लग रे हें वां... टूरिस्ट भी पानी की बोतलें ले ले के किनारे पे मस्त पर्यटन करते हैं, उनपे तो बेन नी लगाया! फिर सुना की दारुडिये मांसमच्छी खा के नर्मदा में फेकंते हैं पानी में.. ये भी अपने गले नी उतरा... इतने सारे रेस्टोरेंट है 'मय्या' किनारे, जिनमे पांच किलोमीटर के दायरे में लोगहोन सब दबा के नानवेज सुतते हैं, उस पे तो बेन नी लगाया ! नी मेरे समजई, नी आया के आखेर तुम ने ये 'नेक' काम क्यों किया ! मुझे तो तुम मुख्यमंत्री कम, एक कथावाचक ज़्यादा लगते हो. तुम बोलते भी विश्व में सबसे ज़्यादा शब्द प्रतिमिनट हो.. पिछले चुनाव में तुमने भिया, मोदी जी से ज़्यादा शब्द प्रति मिनट बोले थे.. एक कथा वाचक ही ये कर सकता है... महाराज और संतओन जैसेइ, सेम लगते हो तुम मेरे को... हर जगह आनन्दम-आनन्दम ये कोई संत ही कर सकता है... तुम्हारे प्रवचन ! सॉरी, भाषण भी सेम लगते हैं... एक कथा वाचक की तरह तुम भाषण दे जाते हो, और उन पर अमल तो कोई नी करता, तुम्हारी सरकारइ नी करती तो और कोन करेगा. वेसेई जैसे संतों की बात पे कोई अमल नी करता...और लोग होन केते हैं के तुम "घोषणा-वीर" मुख्यमंत्री हो.. अरे समजेइ नी भिया वो लोग, के तुम संत हो संत... इसिलिये तो तुमने नर्मदा किनारे दारुबंदी कर दी... मगर तुमने बहुत बुरा किया भिया...
जिंदगी में दो तीन मौके आये जब हमारा मन बहुत खराब हो गया... मजाई नी बचा जीवन में... रसइ नी था.. भेंकर से भेंकर विपदायें आन पडी जीवन में... हमे सोची के अब तो नर्मदा मय्या के आंचल में छलांग लगा के अपनी जीवनलीला समाप्त कर लें. मगर जैसे जैसे नर्मदा मय्या के करीब जाते, वैसे-वैसे वो दारु का ठेका हमारे पास आता. हम जाते तो फूल मूड बना के मरने का. मगर उसके पहले ही रस्ते में ठेका मिल जाता... मरने से पहले आखरी दो पेग लगाते के, मोसम एक दम से सुहाना होने लग जाता... तुम्हारी कसम नर्मदा के किनारे जा के भी हम छलांग नी लगा पाये. छलांग लगाने के पेलेइ हमे एक नई ताकत मिल जाती... मन जोश से भर जाता... हम थोडा टेम लपलपाती लहरों को देखने बेठ जाते.. और नई प्रेरणा मिलती.. हम सोचते के "मां नर्मदा" के जीवन मेंइ इतने थपेडे हैं, ऐसी खतरनाक लहरे हैं तो हमारी क्या बिसात.. हम सोचते के थोडे कष्ट तो हम भी भोग सकते हैं.. लहरों का क्या है..थोडे उतार चडाव तो सबके जीवन में होतेइ हैं... बस हर दफा इसी तरह, हम बगैर छलांग लगाये लौट आये...मगर भिया आज पता नी क्या होगा. आज भी हम भोत निराश हो गये ज़िन्दगी से... आज फिर हम मरना चाहते हैं... और जैसे-जैसे नर्मदा मय्या के किनारे जायेंगे, वैसे-वैसे हमारी ज़िंदगी पर खतरा बढता जायेगा.. क्योंकी आज वो दारु का ठेका हमको रस्ते में नी मिलेगा.. जो तुम्हारे केने से बंद हो गया है...
~कपिल सिंह चौहान
+91 9407117155
 

08 January 2017

सिर्फ लडकी नही है वो...



सिर्फ लडकी नही है, वह दोस्त है तुम्हारी. अजनबी भी हो सकती है, सहयात्री भी हो सकती है किसी बस में, ऑटो में, सहकर्मी भी हो सकती है ऑफीस में, राहगीर भी हो सकती है. उसी रास्ते जिस रास्ते तुम चल रहे हो वह भी किसी काम से या युं ही टहलने या किसी मूड में या तफरी करने या आवारगी में ही घुमने निकली हो. प्लीज़ अकेली छोड दो उसे,  वह तुम से कुछ नही चाहती. रहने दो उसे मस्ती में. जब तक वह खुद तुम से कुछ मांगे ना... वह तो तुम से मदद भी नही मांगेगी... पता है क्यों !! क्योंकी तुम आदमी हो... क्योंकी वह जानती है की दुनिया में ज़्यादातर आदमी ही हैं, मर्द तो बहुत कम हैं... वह डरती है तुम से क्योंकी तुम सिर्फ आदमी हो...

तुम भी तो अपने कम्फर्ट के लिये शॉर्ट पहन कर निकले थे ना घर से... तो उसे भी कम्फर्ट में रहने दो ना. जैसे वो चाहे... सिर्फ तुम्हारी ही वजह से क्योंकी तुम आदमी हो और वह जानती है की तुम उसे रास्ते में मिलोगे इसलिये वह घर से निकलने पर अनकॉम्फर्ट ही रहती है... कॉम्फर्टेबल तो सिर्फ घर में ही रह पाती है... वजह तुम हो... और तुमने समझ लिया की उसे तो हक ही नही वेसा रहने का इसलिये वह ऐसा रहती है...

वह तुम्हे ड्रिंक करते दिखी तो तुमने समझ लिया की वह मूड में है!!!  उसे थोडी चड गयी तो तुम समझे इसे कुछ चाहीये... अरे भाई !! हाँ वह मूड में है... मगर सिर्फ ड्रिंक करने के मूड में है... 

तुम्हे उसके वेस्टर्न पहनने से दिक्कत है... उसने तो अब तक सलवार कुर्ता भी पहना... तब भी तुमने उसे बख्शा नही... तुम ट्रेन में हो या बस में, तुम ऑफीस में हो या घर पर, हर जगह.  जैसे, तुम ड्रायविंग सीट पर बैठे हो या पिछे वाली सीट पर सफर कर रहे हो...जब वह तुम्हारे रिक्शा में पैर रख कर बैठने की कोशीश करती है, उसी वक्त तुम उसे बता देते हो की तुम आदमी हो. उसके रिक्शा में घुसने के लिये झूकते वक्त जब तुम अपनी सीट पर थोडा उठ कर पता कर रहे थे ना की वह, कुर्ती के अंदर से कैसी है तभी वह जान गयी थी की तुम मर्द नही हो... तुम सिर्फ आदमी हो... उसने तुम से कुछ कहा नही, किसी से भी नही कहा, बस वह जान गयी... किससे कहती... किसको सुनाती... सुनने वाले भी तो ज़्यादातर आदमी ही हैं...

तुम्हारी मां, बहिन या पत्नी ने भी तो कभी सलवार-कुर्ता पहना होगा... वो भी तो स्कूल या ऑफिस जाती होंगी, वो भी तो ट्रेन में सफर करती हैं ... बस-रिक्शा में चढती हैं. हम सबकी मां-बहने, पत्नी वही करती हैं, वही सहती हैं जो 'वो' सहती है... और इन सभी को सार्वजनिक जीवन में 'आदमी' मिलते हैं...   

‍‍~ कपिल सिंह चौहान
+91 9407117155

17 November 2016

ये अकेले प्रधानमंत्री मोदी के बस की बात नही है...




प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हज़ार-पांच सौ के नोटों के बंद करने की घोषणा को काले धन व भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जंग मान लिया जाये तो आज सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों में से एक होने के नाते आपकी और हमारी ज़िम्मेदारी बहुत बढ़ गई है. आज जब अपने पैसे को निकलवाने के लिये लाईन में खड़े देशवासियों में से कुछ लोगों की मौत हो गई है तो उन्हें शहीद का दर्जा तो नहीं दिया जा सकता मगर उनके बलिदान को इससे कमतर भी नहीं आंका जा सकता. आज लाईन में खड़े सभी व्यक्ति भ्रष्टाचार और कालेधन के विरुद्ध देश की सबसे बड़ी जंग की शुरुआत पर अपनी-अपनी ओर से आहुति दे रहे हैं और इस आहुति में कुछ लोगों की मौत भी हो गई है.  

अपने ही 4500/- रुपये के नोट बदलवाने के लिये इस लम्बी कतार में घंटों खड़े रहने को अपनी ज़रुरत मान कर नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस जंग में अपना योगदान मान कर खड़े होंगे  तो ही आप इस प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होने से रोक पायेंगे. आप अपनी तरफ से प्रयास नहीं करेंगे तो देश से भ्रष्टाचार और काला धन कभी खत्म नहीं हो पायेगा.

लाईन में खड़े होने में शर्म ना करना...क्योंकि आप देश के लिये जंग लड़ रहे हैं... लाईन में खड़े होने पर आप प्रधानमंत्री को कोसेंगे और थकेंगे तो अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचारियों को कोसेंगे, जिन लोगों के पास अथाह पैसा है, उन्हें कोसेंगे कि उनकी वज़ह से आज आपको अपने घुटने तोड़ने पड़ रहे हैं... घर में शादी, मासिक राशन, बच्चों की फ़ीस, बस का टिकट, माता-पिता की दवाई के लिये आपको क्या-क्या नहीं सहना पड़ रहा... ज़रूर कोसिये ज़िम्मेदारों को... और इस सुची में अपने आप को भी ज़ोड लीजिए... हां... क्या आप स्वयं को नहीं कोसेंगे...!!!? क्यों...??  क्या आप ज़िम्मेदार नहीं हैं...???

माना कि आपके पास कालाधन नहीं है, बेनामी संपत्ति नहीं है, रिश्वत का पैसा भी नहीं है...मगर इस कालेधन और भ्रष्टाचार के लिये आप भी ज़िम्मेदार हैं, हम सब ज़िम्मेदार हैं...

लाईन में खड़े-खड़े याद करें कि कैसे आपने इस काली अर्थव्यवस्था को जन्म देने और पालने पोसने में अपना योगदान दिया है... याद है, जब आपने अपनी ईमानदारी की कमाई से, अपने सपनों का आशियाना बनाने के लिये छोटा सा प्लॉट खरीदा था तो उसकी रजिस्ट्री कैसे करवाई थी? कैसे आप उस दलाल और प्लॉट बेचने वाले की बातों में आ गये थे और फिर आपने 30% चेक से बाकी नकद देने की हामी भर दी थी... कुछ को यह भी याद होगा कि पिताजी की मृत्यु पर उनके नाम की ज़मीन जो स्वतः उनके नाम पर नामांतरित हो जानी चाहिये थी, उसके कैसे झट से पैंतीस हज़ार रुपये दे दिये थे तहसीलदार को...!!  अपने प्लॉट-मकान बिक्री में रजिस्ट्रारों को ऊपर से रुपया देना, ट्रैफ़िक पुलिस वाले से चालान बनवाने के बजाय रिश्वत देना, ट्रेन में जगह ना मिलने पर रिज़र्वेशन कप्म्पार्टमेंट में चढ़कर टी सी को "सेट" करके बर्थ कबाड़ना... शौचालय निर्माण किये बगैर 12,000/- रुपये पर हस्ताक्षर करके 6,000/- रुपये लेना, अपात्र हो कर भी बीपीएल राशन कार्ड बनवाने हेतु 5-7000 रुपये रिश्वत देना...

भाई साहब, आपने ही पैदा की है ये काली कमाई, देश की भी, अफसरों की भी, और उन सब की जिनके पास है ये काली कमाई... आप देते नहीं तो ये सरकारी नौकर आज बेलगाम हो साहब बनकर आपका शोषण नहीं करते...

एक और शब्द "खुशी से"... सरकारी चिकित्सालयों में आपने बेटा पैदा होने पर जो "खुशी से" पैसा बांटा था ना वो आज इतना "कंपल्सरी" हो गया कि आपको अपना ही पैसा लेने के लिये लाईन लगानी पड़ रही है... अरे, ये अफसर सरकारी कारिंदे हैं... आपकी सेवा के लिये इन्हें सरकार ने नियुक्त किया है जिसके लिये इन्हें आप ही के चुकाए टेक्स से त्ंख्वाह मिलती है... फिर आप इन्हें खुशी से क्यों रिश्वत देते हो?
घर में खुशी होने पर हिजड़ों को पैसा बांटा जाता है, क्योंकि उनका कमाई का कोई और ज़रिया नहीं है... वे आपकी खुशी में शामिल होते हैं, दुआएं देते हैं और बदले में आप उनके कुछ समय के राशन का इंतज़ाम कर देते हैं... मगर भ्रष्ट अफसरों को "खुशी से"...? अरे भई, ये अफसर हैं, शासकीय चिकित्सक हैं, बृहन्नलाएं थोड़ी ही हैं...! ढोल बजाने वाला आपके घर आपकी खुशी में "मंगल" बजा जाता है,  इसलिये आप उसे खुशी से बक्षीश दे देते हैं. ये अफसर ढोली थोड़े ही हैं...

मोदी समर्थक और उनकी पार्टी के नेता कह रहे हैं, मोदीजी देश का भ्रष्टाचार दूर करेंगे... कैसे करेंगे...? अकेले कर लेंगे...?? इन मोदी समर्थकों से पूछा है किसी ने कि ये भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ मोदी को क्या सहायता कर रहे हैं...? क्या आपके जिले में उपरोक्त वर्णित   परिस्थितियों में से एक भी परिस्थिति ऐसी नहीं है जिसमें आपको अवैध पैसा ना देना पड़ा हो...? अगर है तो आपके जिले के मोदी समर्थक क्या कर रहे हैं...?? क्या आपका जिला देश में नहीं आता... या मोदीजी किसी और देश का भ्रष्टाचार खत्म करेंगे...!!! या आप मान के चल रहे हैं कि आपके जिले में रामराज्य कायम हो चुका है...!!! मोदी चैन नहीं ले रहे तो उनके समर्थक कैसे इतने आराम से रह रहे हैं...? देश में, प्रदेश में तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, कलेक्ट्रेट, पूलिस विभाग, पंजीयन विभाग, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, निजी विद्यालय, निजी शिक्षण संस्थान, शासकीय व निजी चिकित्सालयों में काले धन की गंगा बह रही है, और ये सब आपके, हमारे या अपनों द्वारा ही संचालित हैं... सबसे मह्त्वपूर्ण समस्त राजनितीक दलों के भ्रष्ट नेताओं का भ्रष्टाचार और कालेधन की उत्पत्ती में मह्त्वपूर्ण योगदान है और उनके ईमानदार साथी उनके इस कृत्य पर हमेशा चुप्पी साध लेते हैं... ये लोग आपके लाईन में खडे होने पर आपकी सेवा सुश्रुसा करें, पानी पिलायें नाश्ता करायें तो कह देना के भ्रष्ट और बेइमानों व उनके साथीयों की मदद नही चाहिये... लाईन में खड़े-खड़े भूखे-प्यासे मर जाना, एक-दुसरे के लिये घर से पानी नाश्ता ले जाना मगर इन राजनैतिक दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं के हाथों का पानी मत पीना...   
 धर्म युद्ध में आपको अपनों से ही लड़ना होगा... पांडवों के समक्ष भी उनके भाई ही थे... लाईन में खड़े होकर सिर्फ पैसे मत लीजियेगा, एक संकल्प भी लीजियेगा... संकल्प कि ‘मैं इस भ्रष्टाचार और कालेधन को रोकने के लिये आज के बाद किसी को रिश्वत नहीं दूंगा...’ सामाजिक रूप से बहिष्कार करो उस नेता का जो आपसे पैसा मांगता है... रोज़ शिकायत करो उस अफसर कि जो आपके छोटे-बड़े कामों के लिये पैसा लेता है...कोई चपरासी, अधिकारी पैसा मांगे तो उससे कहो कि नौकरी में तंख्वाह मिलने के बावजूद मांग के खाने की आदत है तो किसी चौराहे पर बैठ जाओ, तुम्हारे जीवन भर के खाने का इंतेज़ाम हो जायेगा... और उस चौक पर बैठे भिखारी को उस चपरासी की जगह नौकरी पर रखवाने के लिये आवेदन करो... हंगामा करो, उत्पात मचाओ, मीडिया को बुलाओ... मगर एक पैसा भी बेहिसाब का किसी को मत दो...    
       जब तक आप स्वयं कमर नहीं कसेंगे, आपको बार-बार, लगातार आहूति देनी होगी... क्योंकि किसी मोदी में अकेले इतनी क्षमता नहीं है कि वो आपको एक भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र और कालाधन मुक्त अर्थव्यवस्था दे सके...!!

   ~ कुंवर कपिल सिंहं चौहान